आप का हाल कैसा है – हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
अक्सर लोग पूछ बैठते है कि आप का हाल कैसा है? ये सवाल सुन के सोचता हूँ लोग मुझसे पूछते है या ख़ुद को पूछे जाने के लिए पूछते है। अंतत: मैं महसूस करता हूँ कि ज्यादातर ख़ुद को पूछने के लिए पूछते है ये सवाल कि आप का हाल कैसा है, और मैं भी कुछ बातें बता कर उनसे भी यही सवाल पूछ लेता हूँ। कहीं उन्हें बुरा न लग जाए जो अगर ना पूछूं तो। मगर सोचता हूँ कि क्या हो यदि ना पूछूं तो। जानिए इस कविता में –
बेवजह इक नज़र का तोहफ़ा है
वो सादगी में है ये सब्र कहता है
लब आज़ाद होंगे और बरसेंगे किनपर
ज़रा ठहरिए कि ये इक धोखा है
मुश्किल अपनी है और ख़्याल उनका है
माफ़ कीजिए कि सबकुछ आपका है
वहम इतनी भी ना पालिए
कि वो नज़रे झुकाए इक ख़ुदा है
वे वक्त इम्तेहान किसको मंजूर है
आप कहिए आप का हाल कैसा है
जो लिखूं तो जानिए कि सबकुछ अच्छा है
जो ना लिखूं तो जानिए कि सबकुछ सच्चा है_
— ग़ाफ़िल
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