उसके जवाब – मेरे इज़हार की प्रेम कविता । ग़ाफ़िल
तमन्ना से भरे सादगी में लिपटे जब मैंने अपने प्रेम का इज़हार किया तो उन्होने उसके जवाब में लिखा कि –
प्रेम अस्वीकृत है तुम्हारा
इसलिए नहीं कि तुम्हारा प्रेम कोरा है उसमें दाग़ है
या मैं या तुम प्रेम करने योग्य नहीं
प्रेम अस्वीकृत है तुम्हारा
इसलिए कि मैं प्रेम की बुनियाद पे ढह जाऊंगी
अपने कर्तव्यों की खातिर
जो मुझे इजाजत नहीं देते प्रेमी चुनने का_
— ग़ाफ़िल
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