तुम्हारे पास कौन । तनहाई भरी हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
कई सवाल मगर जवाब कुछ नहीं। अक्सर ऐसा ही होता है जब तनहाई कहती है तुम्हारे पास कौन? कई बार हम सवाल पूछते है और जवाब में क्या मिलता है जाने इस कविता में की तनहाई में क्या महसूस करता है दिल।
उसके पास हजारों चेहरे;
तुम्हारे पास कौन है?
एक वो था अब वो भी नहीं;
इस बात के सिवा और कौन है?
नज़्म है, साज है सारा संसार है उसके पास;
तुम्हारे पास कौन है?
दिल है दिलदार है रंगों की बहार है
पतझड़ में भी उसके पास अमरूदो का बाज़ार है
सुर्खियां है खबरे है अखबार है,
सब कुछ है उसके पास;
तुम्हारे पास कौन है?
मौसम है और बरसाते भी
आसमां है और तारें भी
क्या क्या नहीं है उसके पास!!
तुम्हारे पास एक जुगनू भी नहीं, तो;
तुम्हारे पास कौन है?..
— ग़ाफ़िल
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