ये सावन लगे हमारा – प्यार की कविता । ग़ाफ़िल
बारिश, प्रेम और विरह के एहसासों को बयां करती दिल छू लेने वाली हिंदी कविता “ये सावन लगे हमारा” – सावन की रिमझिम में प्रेम की पुकार।
ये सावन लगे हमारा
अपनी जुल्फों से कुछ घटा भेजो
भेजो मेरे रहबर, अपनी खुशबू भेजो
चौतरफा आंगन है मेरा घर का
कुछ बरसात तुम इधर भेजो
ये सावन लगे हमारा
अपनी जुल्फों से कुछ घटा भेजो
आहिस्ते भेजो मगर कुछ तो भेजो
दुआ ना सही तो बद- दुआ भेजो
फूल ना सही तो कांटे भेजो
तस्लीम है तुम्हारे भेजे हुए भेंट
कुछ यूं करो; जो मन करे वो भेजो
ये सावन रहेगा भर मास
आहिस्ते आहिस्ते तुम सब कुछ भेजो
भेजो अगर तुम अपना दिल कभी
जरा संभाल के भेजो
अगर भेजो दो नयन अपने
साथ में भेजो हया अपने
भेजो जो अपने रूप यौवन
साथ में भेजो दर्पण अपने
भेजो जो अपनी कलाई
साथ में भेजो कंगन अपने
भेजो अगर तुम चंद्र सा मुखड़ा
साथ में भेजो बिंदी अपने
भेजो अगर तुम पायल की रुनझुन
साथ में भेजो माथे का कुमकुम
भेजो अगर तुम हार- श्रृंगार
जैसे सावन छेड़े कोई साज
एक रात जब तुम जागो
भेजो जुगनू तुम हजार
भेजो तुम एक प्रेम पत्र
भर कर उसमें प्यार
इत्र भेजो, नूर भेजो
भेजो तुम मोती का हार
ये घटाएं उमड़ पड़े
बिखेरो तुम अपनी जुल्फें यार!..
— ग़ाफ़िल
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