ईश्वर दे देगा तुम्हें – अंतरात्मा की आवाज़ । ग़ाफ़िल
हर बार असफलता और फिर ईश्वर की शरण। कहते है कि ईश्वर दे देगा तुम्हें। यह बात मान लूँ इसलिए कि लोग कहते है या मैं चाहता हूँ कि वो दे दे मुझे जो मैं चाहता हूँ मगर किस तरीके से, किस भाव से और किसलिए? पढ़िये इस कविता में
मैंने माना कि ईश्वर है
और मैंने मांगी बड़ी श्रद्धा विनीत भाव से उससे;
कुछ मेरे लिए
उसने नहीं दिया ।।
मैंने कई प्रयास किए, हर प्रयास के साथ श्रद्धा बढ़ाई
उसने नहीं दिया ।।
फ़िर मैं गया कथित ईश्वर के दूत, उपासक और अनुयाई के पास
उन्होंने कहा, सुनो कुछ ऐसा करो, वैसा करो जैसा मैं बोल रहा
ईश्वर दे देगा तुम्हें
मैंने भी सोचा मान ही लेता हूं, आखिर हर्ज क्या है...
— ग़ाफ़िल
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