बड़ी तबाह हुई वो नज़र – हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
बड़ी तबाह हुई वो नज़र; एक भावनात्मक कविता है जो जीवन की पीड़ा, उलझनों और अधूरे किस्सों की गहराई को दर्शाती है। छोटे से किस्से में समाई बड़ी सच्चाइयों और आत्म-संघर्ष की मार्मिक अभिव्यक्ति। यह रचना तन्हाई, जिम्मेदारी और मन की अनकही बातों को संवेदनशील अंदाज़ में बयान करती है।
बड़ी तबाह हुई वो नज़र
जो झांके उसके हिस्से में
क्या लिखेगा वो
एक छोटे से किस्से में
दरीचे से ना झांकेगा
सारा शहर ना देखेगा
फ़िर कैसे करेगा सबकी बातें
एक छोटे से किस्से में
गाढ़ी दाग़ जितने है सब उसके हिस्से में
सूरत भी तो नहीं, क्या सीरत लिखेगा किस्से में
बड़ी उलझन है कि सुनेगा कौन
कैसे करेगा ताबीर
एक छोटे से किस्से में
संभल के चला तो पीछे छूटेगा
जो तेज चला तो गिर पड़ेगा
थामेगा कौन हाथ उसका
जिंदगी भर का साथ उसका
मैं तो कहूं तू लिखेगा क्या
तेरे मन की पीड़ा; किसे पड़ी
मैं तो कहूं तू छोड़ ये किस्सा
औरों की पीड़ा; तुझसे बड़ी
जा हर सके तो हर सभी के
अपनी पीड़ा दफ़न कर के
होगा तो मिल जाएगा
जो तेरे किस्से में सिमट जाएगा
ख़ैर! मुझे क्या तुझसे लेना देना
मैं तो राही चला अकेला
कभी नज़र आ जाऊंगा
एक छोटे से किस्से में
बड़ी तबाह हुई वो नज़र
जो झांके उसके हिस्से में_
— ग़ाफ़िल
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