फ़िर क्यों उगेगी ?
इन पंक्तियों में ख़ामोशी भी सवाल करती है और इंतज़ार भी साँस लेता है। यह कविता टूटती उम्मीदों, कुचली दूब और फिर भी उग आने की ज़िद…
Read Moreमिजाज़ अच्छे नहीं हैं कुछ..
कुछ दिनों से मिजाज़ अच्छे नहीं हैं कुछ। कोई बड़ी वजह नहीं, बस दिल थोड़ा थका हुआ है। खैरियत पूछी जाती है, मगर दिल की नहीं— और शायद…
Read Moreउसे क्या पता – सामाजिक और आत्मचिंतन की हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
“उसे क्या पता” ग़ाफ़िल की एक मार्मिक हिन्दी कविता है जो व्यक्ति के आंतरिक संघर्ष, निर्णयों की उलझन और उस मौन पीड़ा को…
Read Moreसमय क्या है – दार्शनिक प्रेरणादायक हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
समय क्या है? क्या वह केवल चलता हुआ पहिया है, या हमारे अस्तित्व का आईना? “गाफ़िल” की यह कविता समय, चेतना और स्वयं की खोज पर एक गहन…
Read Moreपत्थर के ख़्वाब – प्रेरणादायक हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
“पत्थर के ख़्वाब” एक प्रेरणादायक हिन्दी कविता है जो इंसान की महत्वाकांक्षा, संघर्ष और आत्मचिंतन की कहानी कहती है। यह कविता दिखाती…
Read Moreएक मार्मिक प्रेम कविता – बेकार की बातें । ग़ाफ़िल
प्रस्तुत प्रेम कविता “बेकार की बातें” इश्क़, मासूमियत और दिल के जज़्बातों को व्यक्त करती है। यह कविता उन भावनाओं की कहानी है…
Read Moreकुंभ पर कविता — आस्था, भय और भीड़ की कहानी । ग़ाफ़िल
प्रस्तुत कुंभ पर कविता आस्था, भय और भीड़ की मानसिकता पर आधारित एक सामाजिक कविता है, जो धार्मिक आयोजन के विभिन्न मानवीय और सामाजिक…
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