मगर आहिस्ते – हिन्दी प्रेम कविता । ग़ाफ़िल
मगर आहिस्ते है न ग़ाफ़िल! तुम्हें कैसे पता की मेरी इबादत, इनायत और नियत सब तुम पर फ़िदा है जो तुम कहते हो मांगों मगर – तुम…
Read Moreलोग मुझे तलाशें
लोग मुझे तलाशें – है न कितनी बेगैरत बात, शायद स्वार्थ भी लग सकता है इस बात में। मगर लोग मुझे तलाशें – यह प्रश्न भी तो…
Read Moreपाबंदी क्यों – स्त्री के सवालों को पूछती हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
पाबंदी क्यों? कितना अहम सवाल हो जाता है किसी लड़की के मन में जब वो अपने सपनों को जीने के लिए कोशिश करना तो दूर उसको सोचने बाहर से…
Read Moreहम आने को है.. हम आयेंगे.. – जीवंत हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
‘हम आने को है.. हम आयेंगे..’ यह रचना जीवन, प्रतीक्षा और परिवर्तन के दौर से गुजरती भावनाओं को शब्द देती है, जहाँ…
Read Moreबरसात इधर है_ दर्दभरी हिन्दी ग़ज़ल । ग़ाफ़िल
ग़ज़ल ‘बरसात इधर है’ इश्क़ की उस तिश्नगी का बयान है जो आँखों में ख़ुदा की मूरत बनकर बस जाती है। सादगी के पीछे छुपी…
Read Moreकि ईश्वर है_ प्रेम आस्था की कविता । ग़ाफ़िल
कि ईश्वर है; को मानते हुए भी अगर हम उसकी इच्छा से अलग रास्ते ढूँढते हैं, तो सवाल ईश्वर पर नहीं, हमारी आस्था की सच्चाई पर उठता है।…
Read Moreकाश! तुम मेरे होते
आमने-सामने की खिड़कियों के बीच अटके उस प्रेम की है जो देखा तो जाता है, जिया नहीं जा सका। हर “काश! तुम मेरे होते” में एक इच्छा है,…
Read Moreतुम ना मिलती तो – एहसास की हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
उस उपस्थिति की कहानी है ‘तुम ना मिलती तो’ जिसने शब्दों को केवल कविता नहीं, दिशा दी। जिस प्रेम ने प्रकृति को देखने का…
Read Moreपायल की झंकार में !! हिन्दी प्रेम कविता । ग़ाफ़िल
यह कविता नज़ाकत और रहस्य के बीच झूलती है, जहाँ सादगी और आकर्षण एक साथ मौजूद हैं। हर शेर में एक छुपा हुआ संसार है इस पायल की झंकार…
Read Moreबातें मेरे प्रेम की – इज़हार ए दिल की कविता । ग़ाफ़िल
बातें मेरे प्रेम की; उस ज़बान में लिखी है जहाँ ख़याल उर्दू से आते हैं और एहसास हिन्दी में ठहर जाते हैं। यह प्रेम बोलता कम है, मगर…
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