इतनी ख़ामोशी पहले कभी नहीं देखी – दर्द भरी हिंदी ग़ज़ल । ग़ाफ़िल
यह खूबसूरत हिंदी ग़ज़ल तन्हाई, दर्द और ज़िंदगी की सच्चाई को बयां करती है। पढ़िए “इतनी ख़ामोशी पहले कभी नहीं देखी” – ग़ाफ़िल की दिल छू लेने वाली ग़ज़लनुमा नज़्म।
इतनी ख़ामोशी पहले कभी नहीं देखी
बात हुई मगर बात नहीं देखी
नज़र में रहे वो; ज़माने ने देखा
मगर जो नज़र में रहे वो नज़र नहीं देखी
बेतकल्लुफ है वो और उसमें बुराइयां हज़ार
मगर कभी हाथों में उसके हाला नहीं देखी
ज़िन्दगी से लड़ता रहा वो ज़िन्दगी भर
मगर ज़िन्दगी ने उसमें ज़िन्दगी नहीं देखी
सुना है किसी ने उसका दिल दुखाया था कभी
सुना है किसी ने उसके चेहरे पर हंसी नहीं देखी
फकत वहम मुझको था कि गम सिर्फ़ मेरे हिस्से में है
मगर वो ऐसा शक्स था मेरे "गाफिल"
जिसने बरसात के मौसम में कभी बरसात नहीं देखी..
— ग़ाफ़िल
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