तू तो सिर्फ मेरा है – दर्दभरी हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
यह कविता मोहभंग, विश्वासघात और आत्मबोध की गहरी पीड़ा को उजागर करती है, जहाँ अपना कहने वाले भी पराए हो जाते हैं और तू तो सिर्फ मेरा है यह एक सवाल बन के रह जाता है।
सुनने में लगता है सारा जहां मेरा है
मेरी उम्र और तजुर्बे में, तजुर्बा मेरा है।।
गिरोह ने फंसा लिया था अपना कह कर
वक्त ने बताया कि कुछ नहीं मेरा है।।
उसूलों वाला ज़मीर का मालिक
बड़ी हवेली में अकेला है।
गाफ़िल रास न आया उसे सोहबत मेरी
जो कहता था; तू तो सिर्फ मेरा है ।।
— ग़ाफ़िल
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