कोशिश जारी है – प्रेरणादायक हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
कई हार, कई प्रयास और मन की उलझनों के बीच कोशिश जारी है और जारी रहनी चाहिए क्योंकि यही जिंदगी जीने का असली सबब है और तरीका भी। पढ़िये इस कविता में मन की उलझनों के बारे में की मन क्या कहता है।
मन की उलझनों में उलझ के
देखता हूं सुख-दुःख, स्वर्ग-नर्क दूसरे में
कभी देखा नहीं अपने मन को, कि
हर सुख का अपना दुःख है
हर स्वर्ग का अपना नर्क है
मन को देखूं या मन से देखूं,
क्या दोनों बात एक है ?
एक है या एकांकी है
या कई परतों में शामिल है
मन बड़ा विचित्र है..
ग़फ़िल के संग उसकी यारी है
यार की होशियारी है;
संभल सकूं,
बस इतनी कोशिश जारी है_
— ग़ाफ़िल
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