चल तुझे आँखों में – प्रेम ग़ज़ल । ग़ाफ़िल
चल तुझे आँखों में उतार के देखता हूँ; एक भावनात्मक और रूमानी हिंदी ग़ज़ल है, जिसमें मोहब्बत, अपनापन और दिल की सादगी का इज़हार किया गया है। इस ग़ज़ल में रिश्तों की नज़ाकत, दोस्ती और इश्क़ की सच्चाई को खूबसूरत अंदाज़ में पेश किया गया है।
चल तुझे आँखों में उतार के देखता हूँ
तू ज़िद कर, मैं तुझे मना के देखता हूँ ॥
तू कहता है तेरे क़दमों में काँटे बिछे हैं
मैं अपनी बग़िया के फूल बिछा के देखता हूँ ॥
सुनता हूँ नज़र ज़माने की बड़ी ख़राब है
मैं तुझे काला टीका लगा के देखता हूँ ॥
ये दोस्ती-दुश्मनी में क्यों उलझना 'ग़ाफ़िल'
चल तुझे आज़मा के, भुला के देखता हूँ ॥
हाथ मिला या चाहे दूरी बना ले मुझसे
मैं तुझे सीने से लगा के देखता हूँ ॥
— ग़ाफ़िल
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