ख़ूबसूरत हो तुम – रोमांटिक हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
मैं क्या कहूँ कि क्या हो तुम – बहुत ख़ूबसूरत हो तुम। क्यों है वो इतनी खूबसूरत इस कविता में –
इक चेहरे की बारीकियों ने
आंखों से कुछ सवाल किया
बांध धागे में लपेट कर
हमें जार जार बेदार किया
चेहरे से मासूमियत और
आइने को अपना राजदार किया
जैसे शिल्पी ने रची हो कोई मूरत
कुछ इस तरह उसने खुद को तैयार किया
देखने वाले की नजर ना हटे
खुद को ऐसा संवार लिया
इनायत रही उसकी प्रार्थनाओं की
जिसने शामों शहर झंकार किया
लोग पत्थर में ढूंढ़े ख़ुदा को
उसने मिट्टी से प्यार किया__
— ग़ाफ़िल
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