ज़िन्दगी तुझे सुलझा के जाऊंगा
यह कविता ज़िन्दगी और इश्क़ के बीच के सफ़र की गहराई को बयान करती है, जहाँ हर दर्द और खुशी को संवारा जाता है। ज़िन्दगी तुझे सुलझा के जाऊंगा के हर शेर में छुपा है एक वादा—समझने, महसूस करने और प्यार के साथ आगे बढ़ने का।
ज़िन्दगी तुझे सुलझा के जाऊंगा
दामन सितम हंसा के जाऊंगा
उड़ा के पतंग आसमानों में
सब धागे खोल जाऊंगा
रख दूंगा कुछ लिखी हुई बातें
कुछ बातें छुपा के जाऊंगा
सूखे गुलाब की पंखुड़ियों में
ओस की परते; बिछा के जाऊंगा
ज़िन्दगी तुझे सुलझा के जाऊंगा
मसलन देर हुई तो देर हुई
प्यार कर के जाऊंगा
राख़ उड़ा के अपनी चिता से
घर ए बेवफ़ा के जाऊंगा
ख़त लिख ना सका तो
बारिश कर के जाऊंगा
उसके आंगन में ए गाफिल
नाम उसके; एक फूल खिला के जाऊंगा
ज़िन्दगी तुझे सुलझा के जाऊंगा
— ग़ाफ़िल
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