गुलाब जब खिलते है – दिल को छु लेने वाली प्रेम कविता । ग़ाफ़िल
कितनी अजीब कशमकश रहती है न जब हम नए नए जवान होते है जैसे गुलाब जब खिलते है। नई उमंग, नई चाहत और दुनिया को देखने का नया नजरिया।…
Read Moreग़ैर मुल्क के होते – प्रेम विरह की कविता । ग़ाफ़िल
हूँ… कितना आसान और कितना मुश्किल हो सकता है प्रेम में विरह। सवाल है कि ग़ैर मुल्क के होते तो, शायद संभल भी जाते, मगर तुम तो…
Read Moreतुम्हारे पास कौन । तनहाई भरी हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
कई सवाल मगर जवाब कुछ नहीं। अक्सर ऐसा ही होता है जब तनहाई कहती है तुम्हारे पास कौन? कई बार हम सवाल पूछते है और जवाब में क्या मिलता…
Read Moreदीवारों पर टंगी हुई – हिन्दी मार्मिक कविता । ग़ाफ़िल
जब अकेलेपन और कठिन प्रयासों के बाद सफलता मिलती है तो कुछ छीजे जेहन मे रह जाती है जैसे नज़रें टिक जाती है दीवारों पर टंगी हुई कुछ…
Read Moreख़ूबसूरत हो तुम – रोमांटिक हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
मैं क्या कहूँ कि क्या हो तुम – बहुत ख़ूबसूरत हो तुम। क्यों है वो इतनी खूबसूरत इस कविता में – इक चेहरे की बारीकियों…
Read Moreमगर आहिस्ते – हिन्दी प्रेम कविता । ग़ाफ़िल
मगर आहिस्ते है न ग़ाफ़िल! तुम्हें कैसे पता की मेरी इबादत, इनायत और नियत सब तुम पर फ़िदा है जो तुम कहते हो मांगों मगर – तुम…
Read Moreलोग मुझे तलाशें
लोग मुझे तलाशें – है न कितनी बेगैरत बात, शायद स्वार्थ भी लग सकता है इस बात में। मगर लोग मुझे तलाशें – यह प्रश्न भी तो…
Read Moreज़िन्दगी तुझे सुलझा के जाऊंगा
ज़िन्दगी, प्यार और एहसासों की गहराई पर लिखी यह कविता “ज़िन्दगी तुझे सुलझा के जाऊंगा” हर शेर में संवेदनाओं और इश्क़ की मिसाल पेश…
Read Moreउसे क्या पता – सामाजिक और आत्मचिंतन की हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
“उसे क्या पता” ग़ाफ़िल की एक मार्मिक हिन्दी कविता है जो व्यक्ति के आंतरिक संघर्ष, निर्णयों की उलझन और उस मौन पीड़ा को…
Read Moreसमय क्या है – दार्शनिक प्रेरणादायक हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
समय क्या है? क्या वह केवल चलता हुआ पहिया है, या हमारे अस्तित्व का आईना? “गाफ़िल” की यह कविता समय, चेतना और स्वयं की खोज पर एक गहन…
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