दीवारों पर टंगी हुई – हिन्दी मार्मिक कविता । ग़ाफ़िल
जब अकेलेपन और कठिन प्रयासों के बाद सफलता मिलती है तो कुछ छीजे जेहन मे रह जाती है जैसे नज़रें टिक जाती है दीवारों पर टंगी हुई कुछ…
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