तू तो सिर्फ मेरा है – दर्दभरी हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
यह कविता मोहभंग, विश्वासघात और आत्मबोध की गहरी पीड़ा को उजागर करती है, जहाँ अपना कहने वाले भी पराए हो जाते हैं और तू तो सिर्फ…
Read Moreग़ैर मुल्क के होते – प्रेम विरह की कविता । ग़ाफ़िल
हूँ… कितना आसान और कितना मुश्किल हो सकता है प्रेम में विरह। सवाल है कि ग़ैर मुल्क के होते तो, शायद संभल भी जाते, मगर तुम तो…
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