पीली धूप सी आँखों में..
यह गीत भावनाओं और अनुभवों से प्रेरित एक मौलिक हिंदी रचना है।
इसके शब्द लेखक द्वारा स्वयं लिखे गए हैं, जिनका उद्देश्य भावों को संगीतात्मक रूप में प्रस्तुत करना है।
गीत (Lyrics)
हम्म्म…
ओ महरम…
हम्म्म…
दिल की ख़ामोशी में… तेरा ही नाम…
हम्म्म…
पीली धूप सी आँखों में, ख़्वाब उतर आते हैं
तेरे क़दमों की आहट से, मौसम ठहर जाते हैं
भँवरे छेड़ें सरगम, फूल भी शरमा जाते हैं
तेरी नज़रों के आगे, हम खुद को भूल जाते हैं
यादों की गलियों में, तेरा ही पता है
मेरे हर सवाल में, तेरा ही जवाब है
मेरे शहर की रातों ने, तुझको पुकारा है
तेरे बिन इस दिल ने, सब कुछ हारा है
“हा…रा है…”
पीली धूप सी आँखों में, ख़्वाब उतर आते हैं…
रातों के सफ़र में यूँ, मुझसे जुदा न होना
दिल जो भी कहता है, उसे अधूरा न रखना
इश्क़ की इस नर्मी में, खुद को भुला बैठा हूँ
“ग़ाफ़िल” हूँ मैं, तुझमें ही सब कुछ पा बैठा हूँ
हम्म्म…
अगर मैं ग़ाफ़िल हो जाऊँ…
तो आके… मुझे थाम जाना…
— ग़ाफ़िल
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अस्वीकरण (Disclaimer):
इस पोस्ट में प्रस्तुत गीत/लिरिक्स पूर्णतः मौलिक हैं और लेखक द्वारा स्वयं लिखे गए हैं।
साथ में दिया गया ऑडियो एक AI-generated / demo reference है,जिसका उद्देश्य केवल गीत की भावनात्मक प्रस्तुति को समझाना है।
यह किसी भी प्रकार की व्यावसायिक रिलीज़ या कॉपीराइट का दावा नहीं करता।
यदि आप इस गीत को संगीत या किसी अन्य रचनात्मक उद्देश्य के लिए उपयोग करना चाहते हैं, तो संपर्क करें।
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