कोई पुकारे… कोई पुकारे…
यह गीत भावनाओं और अनुभवों से प्रेरित एक मौलिक हिंदी रचना है।
इसके शब्द लेखक द्वारा स्वयं लिखे गए हैं, जिनका उद्देश्य भावों को संगीतात्मक रूप में प्रस्तुत करना है।
गीत (Lyrics)
घाट घाट मैं गली बनारस
चित चितवन की महफ़िल में
बाजे शंख बाजे नगाड़े
कोई पुकारे... कोई पुकारे...
गली गली मैं भटकूं चौबारे
भरी दोपहरी शाम भुला के
रिमझिम रिमझिम बारिश में
कोई पुकारे... कोई पुकारे...
घुंघरू की छन छन में
तेरे पायलों की रुन झुन में
उस ओर..जिस ओर कोई न जाता
कोई पुकारे... कोई पुकारे...
शाम की मतवाली बेला में
तेरे अधरों की कंपन में
निकले झंकार जैसे
कोई पुकारे... कोई पुकारे...
नौका विहार चांदनी रात में
देखूं तुझे मैं गंगा किनारे
मल्लाह के मल्हार में
कोई पुकारे... कोई पुकारे...
— ग़ाफ़िल
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अस्वीकरण (Disclaimer):
इस पोस्ट में प्रस्तुत गीत/लिरिक्स पूर्णतः मौलिक हैं और लेखक द्वारा स्वयं लिखे गए हैं।
साथ में दिया गया ऑडियो एक AI-generated / demo reference है,जिसका उद्देश्य केवल गीत की भावनात्मक प्रस्तुति को समझाना है।
यह किसी भी प्रकार की व्यावसायिक रिलीज़ या कॉपीराइट का दावा नहीं करता।
यदि आप इस गीत को संगीत या किसी अन्य रचनात्मक उद्देश्य के लिए उपयोग करना चाहते हैं, तो संपर्क करें।
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