दिल ज़रा संभल ज़रा..
यह गीत भावनाओं और अनुभवों से प्रेरित एक मौलिक हिंदी रचना है।
इसके शब्द लेखक द्वारा स्वयं लिखे गए हैं, जिनका उद्देश्य भावों को संगीतात्मक रूप में प्रस्तुत करना है।
गीत (Lyrics)
हम्म्म…
ओ साईंयाँ…
हम्म्म…
चाँद भी… मशरूफ़ है… उस हुस्न के; दीदार में…
कहता भी… सुनता भी… बातें उन्हीं के प्यार में…
रातें भी… अब गा रही… सपनों की धीमी धार में…
दिल ज़रा… संभल ज़रा… गाफ़िल के; इंतज़ार में…
हर साँस पूछे मुझसे, वो कब लौट के आएँगे,
बुझे से इन उजालों को, फिर कैसे जलाएँगे।
दरवाज़े पे टिकती है, हर शाम मेरी नज़र,
शायद इन्हीं राहों से, वो आज गुज़र जाएँगे।
चाँद भी… मशरूफ़ है… उस हुस्न के; दीदार में…
दिल ज़रा… संभल ज़रा… गाफ़िल के; इंतज़ार में…
लिखे थे नाम उनके, मैंने हथेली पे कभी,
लकीरें आज भी पूछें, वो क़िस्मत में है या नहीं।
बिन उनके अधूरी है, ये धड़कन ये खामोशी,
इक उम्र गुज़र जाए, ये चाहत मगर कम नहीं।
ना शिकवा किसी से है,
ना कोई शिकायत है,
बस तुम लौट आओ,
यही मेरी इबादत है…
कभी ख़्वाब बन के आएँ, कभी नींद बन के ठहरें,
मेरी रातों की तन्हाई, बस उनसे ही सवरे।
दुनिया को क्या खबर है, गाफ़िल किस हाल में है,
वो पूछें अगर किसी से, तो कह देना — इंतज़ार में है।
चाँद भी… मशरूफ़ है… उस हुस्न के; दीदार में…
कहता भी… सुनता भी… बातें उन्हीं के प्यार में…
दिल ज़रा… संभल ज़रा…
गाफ़िल आज भी…
उसी के इंतज़ार में…
हम्म्म…
तेरे बिन…
हर पल अधूरा है…
AI Voice (Demo)
— ग़ाफ़िल
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अस्वीकरण (Disclaimer):
इस पोस्ट में प्रस्तुत गीत/लिरिक्स पूर्णतः मौलिक हैं और लेखक द्वारा स्वयं लिखे गए हैं।
साथ में दिया गया ऑडियो एक AI-generated / demo reference है,जिसका उद्देश्य केवल गीत की भावनात्मक प्रस्तुति को समझाना है।
यह किसी भी प्रकार की व्यावसायिक रिलीज़ या कॉपीराइट का दावा नहीं करता।
यदि आप इस गीत को संगीत या किसी अन्य रचनात्मक उद्देश्य के लिए उपयोग करना चाहते हैं, तो संपर्क करें।
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