प्रेम में तुम्हारे.. खूबसूरत प्रेम शायरी । ग़ाफ़िल
प्रेम में तुम्हारे? ये ऐसा सवाल और एहसास है जो हर नए प्रेमी – प्रेमिकाओं को महसूस होता है। और जब यह एहसास महसूस होता है तो लगता है अब जिंदगी मुक्कमल हुई। इन्हीं एहसासों को समेटे है ये हिन्दी रोमांटिक शायरी।
गिन के अभी चार दिन हुए है
पर लगता है सालों से जानता हूँ तुम्हें
एक क़यास सी लगी रहती है मन में
कि क्या मैं हूँ प्रेम में तुम्हारे!!
– ग़ाफ़िल
तिलिस्म तेरी बातों का
मेरी राहों में सजर करता है
मेरा मन; बैठे बैठे; न जाने कितनी दफ़ा
तेरे ख्यालों में सफर करता है!!
– ग़ाफ़िल
कि तुझे समेट लूँ
अपने आगोश में कुछ इस तरह कि,
ये पल थम जाए
वहीं के वहीं; और,
तेरे एहसासों की गरमी में
इस कदर लिपट जाऊँ; कि
आधा – अधूरा सा मैं;
अब मुक्कमल कहलाऊँ!!
– ग़ाफ़िल
— ग़ाफ़िल
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