पायल की झंकार में !! हिन्दी प्रेम कविता । ग़ाफ़िल
यह कविता नज़ाकत और रहस्य के बीच झूलती है, जहाँ सादगी और आकर्षण एक साथ मौजूद हैं। हर शेर में एक छुपा हुआ संसार है इस पायल की झंकार में !!
अधरो पर मुस्कान रखते है
डायरी में संसार रखते है
सुना है..
आप महफिलों से हैरान हुए जाते है
सादगी में श्रृंगार नज़र आते है
लबों से कुछ बोलते नहीं
अपनों को तौलते नहीं
सुना है..
जुल्फें आपकी मतवाली है
उलझ जाए तो फ़िर सुलझती नहीं
आंखों का काजल अपने शबाब पर रहता है
न जाने कितनों के ख़्वाब में रहता है
किन ख्यालों से हो कर गुजरते है आप?
नगीने में किस की पहचान रखते है?
सुना है..
किसी ख़ास चीज़ की तलब नहीं आपको
आप पायल की झंकार में अज़ान रखते है!!
— ग़ाफ़िल
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