रात कुंवारी है – हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
यह कविता उम्मीद और बेचैनी के बीच झूलते मन की कोमल अवस्था को दर्शाती है। रात की लंबाई, सब्र का टूटना और हल्की-सी मुस्कान; इन सबके…
Read Moreतू तो सिर्फ मेरा है – दर्दभरी हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
यह कविता मोहभंग, विश्वासघात और आत्मबोध की गहरी पीड़ा को उजागर करती है, जहाँ अपना कहने वाले भी पराए हो जाते हैं और तू तो सिर्फ…
Read Moreबड़ी तबाह हुई वो नज़र – हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
बड़ी तबाह हुई वो नज़र; एक भावनात्मक कविता है जो जीवन की पीड़ा, उलझनों और अधूरे किस्सों की गहराई को दर्शाती है। छोटे से किस्से में…
Read Moreग़ैर मुल्क के होते – प्रेम विरह की कविता । ग़ाफ़िल
हूँ… कितना आसान और कितना मुश्किल हो सकता है प्रेम में विरह। सवाल है कि ग़ैर मुल्क के होते तो, शायद संभल भी जाते, मगर तुम तो…
Read Moreतुम्हारे पास कौन । तनहाई भरी हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
कई सवाल मगर जवाब कुछ नहीं। अक्सर ऐसा ही होता है जब तनहाई कहती है तुम्हारे पास कौन? कई बार हम सवाल पूछते है और जवाब में क्या मिलता…
Read Moreफ़िर क्यों उगेगी ?
इन पंक्तियों में ख़ामोशी भी सवाल करती है और इंतज़ार भी साँस लेता है। यह कविता टूटती उम्मीदों, कुचली दूब और फिर भी उग आने की ज़िद…
Read Moreमिजाज़ अच्छे नहीं हैं कुछ..
कुछ दिनों से मिजाज़ अच्छे नहीं हैं कुछ। कोई बड़ी वजह नहीं, बस दिल थोड़ा थका हुआ है। खैरियत पूछी जाती है, मगर दिल की नहीं— और शायद…
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