आप का हाल कैसा है – हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
अक्सर लोग पूछ बैठते है कि आप का हाल कैसा है? ये सवाल सुन के सोचता हूँ लोग मुझसे पूछते है या ख़ुद को पूछे जाने के लिए पूछते है।…
Read Moreदो दिन बाद होली है – हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
चलो गाँव चले कि दो दिन बाद होली है। शहर तो बस जीने कमाने का जरिया है असली होली तो गाँव की होली है। चलो चलते है होली के बहाने गाँव…
Read Moreपाबंदी क्यों – स्त्री के सवालों को पूछती हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
पाबंदी क्यों? कितना अहम सवाल हो जाता है किसी लड़की के मन में जब वो अपने सपनों को जीने के लिए कोशिश करना तो दूर उसको सोचने बाहर से…
Read Moreकि ईश्वर है_ प्रेम आस्था की कविता । ग़ाफ़िल
कि ईश्वर है; को मानते हुए भी अगर हम उसकी इच्छा से अलग रास्ते ढूँढते हैं, तो सवाल ईश्वर पर नहीं, हमारी आस्था की सच्चाई पर उठता है।…
Read Moreउसे क्या पता – सामाजिक और आत्मचिंतन की हिन्दी कविता । ग़ाफ़िल
“उसे क्या पता” ग़ाफ़िल की एक मार्मिक हिन्दी कविता है जो व्यक्ति के आंतरिक संघर्ष, निर्णयों की उलझन और उस मौन पीड़ा को…
Read Moreकुंभ पर कविता — आस्था, भय और भीड़ की कहानी । ग़ाफ़िल
प्रस्तुत कुंभ पर कविता आस्था, भय और भीड़ की मानसिकता पर आधारित एक सामाजिक कविता है, जो धार्मिक आयोजन के विभिन्न मानवीय और सामाजिक…
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