दिल वैरागी है…दर्द भरी हिन्दी शायरी । ग़ाफ़िल
दिल वैरागी है या नहीं ये समझना उतना ही मुश्किल है जितना एक रिश्ते की नजाकत को समझना। प्रेम में कई सवाल आते है और उन सवालों के साथ दुख और पीड़ा, और उसी पीड़ा से चार शब्द शायरी के जन्म लेते है।
कठिन संघर्ष के बाद मैंने मान लिया कि
मेरा दिल वैरागी है
हज़ार फूल अर्पित करने के बाद;
ये किसी देवता का हो जाना चाहता है
मगर; काँटों का चाहना इसका बाक़ी है!!
– ग़ाफ़िल
रफ्ता रफ्ता दिल गया
छ्लक के उनके पयमाने से,
ख़त मिला हमें आज उनका
बीते हुए अफ़साने से!!
– ग़ाफ़िल
रिश्तों की डोरिया इतनी उलझी हुई क्यों होती है?
कहीं ना कहीं, एक शिरा तो उसके भी उँगलियों को छूती होगी!!
– ग़ाफ़िल
— ग़ाफ़िल
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