कलीरे तेरी चूड़ी में…
यह गीत भावनाओं और अनुभवों से प्रेरित एक मौलिक हिंदी रचना है।
इसके शब्द लेखक द्वारा स्वयं लिखे गए हैं, जिनका उद्देश्य भावों को संगीतात्मक रूप में प्रस्तुत करना है।
गीत (Lyrics)
ओ…
हम्म…
सावन धीरे-धीरे
दिल के दरवाज़े आए…
कलीरे,, तेरी चूड़ी में बहके तो,, ऐसा लगे है...
जैसे बहका है मोरा सावन...
दिल भी आज उसी लय में
अनजाने से गीत गाए जाए,, मोरा सावन...
फिज़ाओं की दहलीज पे
आ के बरसा है सावन..
भीगी-भीगी सी हर सांस में
तेरा ही नाम समाए..
फूल फिज़ाओं मे फैले है
मानो, प्यासों की प्यास बुझी हो
सूखे मन की धरती पर जानम
कोई पहली बारिश हो जैसे...
मेरे मन में कहीं तो तुम छुपे हो,,, दिलबर
मानो, चांद बादलों में छुपा हो जैसे
नज़रों से जो दिखता नहीं
पर हर पल साथ चला हो ऐसे...
ओ…
हम्म… गाफ़िल...
तारे पूछ रहे है,, रात बाकी है कितनी
ख़ामोशी गिन रही है,, सांस बाकी है कितनी
मैं पूछ रहा हूं तुमसे
ये मुलाक़ात बाकी है कितनी
रंगत में बहार निखर आई है
जब से तूने अपनी चूड़ी खनकाई है
इस छोटी सी आवाज़ ने
मेरी सारी नींद उड़ाई है
मोर पपीहे,, सब गाने लगे है
कलीरे की धुन पे साज सजाने लगे है
पेड़, पवन... ये आसमान तेरे...
होने का जश्न मनाने लगे है
हम्म…
ओ…
मिट्टी से तिलक लगा के है बैठे
जैसे तुमने कहा था
दिल ने भी मान लिया
जो तूने कभी अनकहा था
बारिश मिट्टी से मिलन को आने लगे है
जैसे बिछड़े अरमान मुझे पाने लगे है
कलीरे तेरी चूड़ी में
सपने फिर से बंध गए
सावन, फिज़ाएँ और ये पल
हम दोनों में सिमट गए
ओ…
हम्म…
ओ…
— ग़ाफ़िल
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अस्वीकरण (Disclaimer):
इस पोस्ट में प्रस्तुत गीत/लिरिक्स पूर्णतः मौलिक हैं और लेखक द्वारा स्वयं लिखे गए हैं।
साथ में दिया गया ऑडियो एक AI-generated / demo reference है,जिसका उद्देश्य केवल गीत की भावनात्मक प्रस्तुति को समझाना है।
यह किसी भी प्रकार की व्यावसायिक रिलीज़ या कॉपीराइट का दावा नहीं करता।
यदि आप इस गीत को संगीत या किसी अन्य रचनात्मक उद्देश्य के लिए उपयोग करना चाहते हैं, तो संपर्क करें।
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